अध्याय 117 भ्रमित होने का नाटक

ऑलिवर से निपटने की झंझट एस्ट्रिड को बिल्कुल नहीं चाहिए थी। भौंहें चढ़ाए उसने उसकी असावधानी का फायदा उठाया और अपना हाथ छुड़ा लिया।

कुछ देर पहले पट्टी करते समय ही वह उसकी बाकी चोटें भी देख चुकी थी और उसे लगा था कि चेहरे पर लगी खरोंचें मामूली हैं। उसने तय कर लिया कि उस पर और मेहनत करना बेकार है।

वह ब...

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